Drishyam 2 Movie Review दृश्यम २ मूवी रिव्यू
Drishyam 2 Movie Review मूवी रिव्यू
पिछले साल मोहनलाल जी का "दृश्यम २" अमेझॉन प्राइम पर प्रदर्शित किया गया था।
इस साल उसका हिंदी रिमेक अभिषेक पाठक जी ने प्रदर्शित किया।
"दृश्यम" के सफल २०१५ के बाद अभिषेक पाठक के ऊपर इसकी सफतला और इसकी गुणवत्ता स्टोरी उसके साथ डायरेक्शन की ज़िमेदारी थी।
निशिकांत कामत जी ने सफ़ल निर्देशन किया था उसको बनाया रखना अभिषेक पाठक के ऊपर जिम्मेदारी थी।
इस परीक्षा में अभिषेक पाठक १००% सफ़ल हुए हैं।
लेखक सहयोगी अमिल इनका बड़ा योगदान उनको मिला।
सभी स्टारकास्ट पिछले "दृश्यम" की थी, यह भी एक बड़ी बात इस फ़िल्म को थी, विजय सालगावकर, गायतोंडे, मीरा देशमुख, नंदनी, अंजू, अनु इन सभी पात्रों ने पिछले "दृश्यम" की तरह ही दर्शकों की नजरों में सफ़ल हुए हैं।
IG तरुण अहलावत इस फ़िल्म में नए क़िरदार के रूप में उनकी एन्ट्री हुईं।
विजय सालगावकर को दोषी ठहराया जाने में IG तरुण अहलावत भुमिका बहुत ही सुन्दर निभाया है। यह किरदार अक्षय खन्ना ने निभाई है।
इस तरह फिल्म राह पकड़ती है की विजय सालगावकर अपना गुनाह कबूल कर लेता है, मीरा देशमुख के बेटे की हत्या कर बॉडी पोलिस ढाने के नीचे धफनाई हैं ये कबूल कर लेता है।
पर उसके बाद वो खुदको और आपने पूरे परिवार को किस तरह बचाता है यह देखना दिलचस्प होगा।
पुलिस सिस्टम और अंग्रेज सरकार के साथ चलते आ रहे कानून का असंतोष इस फ़िल्म मे लेखक और निर्देशक के रूप में नजर आता हैं।
'न्याय की जररूत सबको है, मगर सबसे ज्यादा जरूरत मरे हुए को पड़ती है'.
इस अक्षय खन्ना के मशहूर डालॉयग के साथ, ये फ़िल्म देखणे को मिळती हैं।
अक्षय खन्ना:-
'न्याय की जरत रूसबको है, मगर सबसे ज्यादा जरूरत मरे हुए को पड़ती है'.
विजय सालगावकर डालॉयग :-
'हाथ की लकीरों पर मत जाओ गालिब, किस्मत तो उसकी भी होती है जीने हाथ नहीं होते'
IG मीरा देशमुख:-
'मैंने एक चौथी पास केबल ऑपरेटर को कम आंकने की गलती की थी
श्रिया सरन:-
'डेमॉरलाइज का मतलब नोटबंदी'

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